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अपने घर को बचाने चले है ( कविता )

Posted On 22 Mar, 2016 Hindi Sahitya, Junction Forum, कविता में

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रूठे हुओ को मनाने चले है ,
अपने घर को बचाने चले है !
गलती हमारी हो या उनकी ,
सबको आज भूलाने चले है ,
अपने घर को बचाने चले है !
साथ रहे बचपन में ,
साथ बड़े जवानी में ,
यादो को फिर हम ,
जगाने चले है !
अपने घर को बचाने चले है
जो कुछ कमाते है
सब यही रह जाता है
यादो का मंजर
आँखों में रह जाता है !
प्यार को दिल में
सजाने चले है !!
अपने घर को बचाने चले है …



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vikaskumar के द्वारा
March 26, 2016

सुन्दर भाव .

    aman kumar के द्वारा
    May 17, 2016

    विकास जी का हार्दिक आभार

jlsingh के द्वारा
March 23, 2016

होली के अवसर पर, हम राग द्वेष छोड़ सबको गले से लगाने चले हैं / अपने घर को बचाने चले है. बहुत अच्छा अमन कुमार जी! प्रयास जारी रहनी चाहिए!

    aman kumar के द्वारा
    May 17, 2016

    आजकल के पारिवारिक रिश्तो को सोच कर ही ये विचार आये थे …आपका  आभार  


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