उलझन !मेरे दिल की ....

उलझन !.मेरे दिल की ....दिल की लड़ाई अब भी दिमाग से है !

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आजाद लड़की ! भाग - 1

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ये कहानी भी आपको मेरी अन्य कहानी सी असली सी लगेगी , आखिर हम मंटो के चेले है ! यही आपकी हमारे लिए जर्रानावाजी होंगी ।
खुसबू ,यही तो नाम है उसका जो हमारे सरकारी आवास परिसर में रहने आई है।किसी छोटे कस्बे से , पर देखने में मेट्रो गर्ल थी । यु तो तो मात्र वो कुछ माह के लिये प्रशिक्षण के लिए ही आई है हमारे सिचाई बिभाग में ,पर सहाब क्या खूब आई है ? मानो गर्मियों के मौसम में भी दिल का गार्डन रंगीन हो गया हो सभी रंगो के फूलो से …
अब अगर फूल खिला है ।तो भवरे तो आयेंगे ही . बहुत दिनों से खाली जो पड़े थे .अब तो 15 से 75 साल वाली उम्र के हर पद /जाति /धर्म /काले -सफ़ेद /कमजोर /ताकतवर /विधुर /विवहित /सफल/ असफल /S .C /S ,T /O .B .क / अल्पसंख्यक बिना किसी भेद -भाव के नये -नये नहाये – धोये से लग रहे थे ,सबको पता था मुकबला बड़ा मुश्किल है ..”.ये सा… लड़के बड़े बेकार है सहाब !;आवारा हो गए है सब के सब !पुरे दिन इधर से उधर मोटर सयकिल पर ….
कुछ काम नही है 1 । बस खाली घूमते रहते है अपनी मोटर साईकिल पर ,हर बुड्ढा दीवाना यही सोच रहा था इन लडको को कालोनी से बहार होना चाईए था । (जबकी उनकी अपनी कन्याए कालोनी के बहार ही घुमती रहती थी क्युकी समजदार लडकिया अपनी कालोनी में कभी बदनाम नही होती )?
कुछ युवा बूढ़े तो अपने ही सुपुत्रों से ही चिढ़े हुए थे ,अपने नये कपडे उनको जेब खर्च देना बंद कर दिए | सा …….. आवारा हो गया है कह कर।सबको बताते भी थॆ !
उधर परिसर के सभी जवान लड़के भी नहा धोकर अपनी ,मांगी हुई bikes पर चक्कर लगा रहे थे .पर वो सब बचपन से ही एक दल में रहे थे ।
bikes /”विशेष किताबे /क्रिकेट बेट /G .F / खाली कमरा /पॉकेट मनी /सिगरेट /दारू /जींस / मुर्गा खाना सब एक साथ ही प्रयोग करते थे ।कद्दू कटेगा सब में बटेगा , टाइप कांट्रेक्ट था उनका आपस मे !
सबसे बड़े काले कुत्ते तो वो थे .जो ३५ -४५ बलि उम्र के पत्नी व्रता होने क्क ढोंग करते थॆ ,जो किसी कद्दू को खा नही पा रहे थे ,उनकी अपनी बीबी /या माता जी जेम्स बोंड की दादी जो थी ? ये सबसे
गंदे लोग होते है न कद्दू खाने लायक इनके दन्त होते है नो ही दुसरो को
कद्दू खाने देते है |
अब वो भी आजाद थे ,।

अचानक आवास परिसर में सुनामी आ गयी ,बिना जवाल्मुखी फटे ,हर कोई तबहा हो गया था हुआ ये की बसंत पंचमी के दिन हुए प्रोग्रम्म में ,एक – काले कुते बाले दल के मुखिया ने खुसबू को कुछ बोल दिया पर, छेड़ा नही था !वो बचन उस बारे में था जो खसबू की टी- शर्ट पर , विशेष स्थान लिखा ,प्रेम निमंत्रण जैसा बाक्य ,जिसे पडकर ही अलग अर्थ का अनर्थ
बनता था | जब वो , कुछ उम्र को धोका देती माताजी टाइप महिलायों के साथ MARRY -GO -ROUND खेल रही थी ।पर बोला क्या था ? शायद उसे भी नही पता है .अगले ही दिन लिखित मै शिकायत कार्यालय में आ गयी।पर उस दिन खेल मे एक बड़ी उम्र के सहयोगी सरदार जी भी जोर जोर से चिल्ला रहे थे माताजी टाइप पर का खेल देख कर , उनकी तो किसी ने सिकायत न की क्यों ?साथ ही ख्स्बू के मुख्या अधिकारी महोदय, ललवानी सहाब भी बहुत लाल -पीले हुये प्रसासनिक अधिकारी पर ।इस मुद्दे पर ।मनो उनके बीबी को किसी ने कुछ कह दिया हो . यानि आग बहा भी लगी थी |
6-7 लडको / पुरुषो के नाम थे। कुछ तो एसे नाम थे जो लोग उस दिन शहर में ही नही थे ,और कुछ तो उस इलाके में पैदा ही नही हुये थॆ अभी तक । अरे ! हम गरीबो के नाम कोन जानता है बस भगवान ही जानता है दुःख देने को ।इसलिए मामला उलझ गया । किस को किस अपराध में क्या सजा दे ? मामला द्वा दे या सजा – ए – मौत – इ- तवादला या निलंबन दे डाले , फिर बड़े लोगो ने समझाने के नाम ,पर लड़की के साथ , दो तीन बार चाय -पानी की और PROBATION में चल रहे तीन चार नये लोगो को बुला कर पहले डाटा , फिर माफ़ी मंगवा दी, और उनमे जो लोग बहा पर थे भी नही। उन्हें भी मांगनी पड़ी मज़बूरी में ! ।अगर किसी PERMANENT कर्मचारी से कहते तो चपरासी भी पहले मुस्करा कर बड़े सहाब को देखता फिर माफ़ी मांगने को साफ मना कर देता । यूनियन बाले भी हंगामा कर डालते बात उपर तक जाती ! साम-दाम-दंड-भेद के चाणक्य सिद्दांत के बिना कहा ? कोई अफसर बना रहे सकता है ? राज्य सरकार में ? तो मामला ठीक से बेठा दिया गया ।सब अफसर खुश हो गए, मानो सरकार ने महगाई को काबू कर लिया हो। विदेश से काला धन बापस ले आये हो !बाबा रामदेव और अन्ना जी को किसे मामले में फास लिया हो | क्रिकेट मे भारत ने विश्व कप जीत लिया हो !

अब लड़की अपने को हिलेरी क्लिंटन जितनी ताकतवर समजने लगी थी ,सारे शहोदे डर गए थे ,ऐसे घूम रहे थे जैसे कुत्तो को रेबीज हो गयी हो,सारे डावेर मेंन डॉग अपने पूंछ कटा बेठे ये हालत थी उनकी । उधर अफसर उसका हालचाल पूछते थे , कोई सलेब्रेटी हो जैसे !आमजन उसके चरित्र पर जीवनी लिखने लगे थे। पर पता नही क्यों हर सुख के बाद दुःख ! अच्छाई के बाद बुराई क्यों मिलती है ?
सभी काले कुत्तो ने अपने विशेष स्थान पर अति गोपनीय मिटिंग बुलाई !जिसमे वो ही लोग बुलाये गए थे। जो मर्दों की इज्ज़त के लिए जान पर भी खेल जाये !पर कोई हल न निकला …………..
पर अचानक 14 feb के महान फेस्टिवल पर ,अरे ! अपना valentine day !खुसबू की सारी खुसबू पर हवा हो गयी !
और पिटे हुए मोहरों को चेक दिए बिना ही मेट देने की चाल मिल गयी ।और सारे अपने को सतरंज के खिलाडी समजने लगे |
ऐसा क्या हुआ ? यू तो वेलेंटाइन पर किसी को टाइम नही होता पर जो लोग दुसरो को देख कर रोते रहेते है। उन पर टाइम की कभी कमी नही होती।बैठे थे कुछ दिलजले 8pm के साथ ,तभी ख़बरी ने आकर लाखो की खबर दी की “खुशबू के साथ कोई बहार का लड़का है और दोनों कालोनी में अकेले है !घर – होस्टल जा रहे है ।
सुनते ही नशा चड़ने लगा ,तुरंत योजना बनी नाम दिया गया ऑपरेशन सनी लीओन ,सबकी सहमति फ़ोन पर ले ली गयी ।

फील्डिंग लगा दी गयी ,युवराज सिंह जैसे अच्छे फिल्डर , मेन गेट कालोनी गार्ड के साथ और बेदम फील्डर , मनिंदर जैसे उसके घर पर दूरबीन लगा कर, सिगरेट जला कर बेठेगे । हर हालत में सबको 10.30 पर रूम पर मिलना था अपनी अपनी रिपोर्ट्स लेकर क्युकी रात को 10 बजे मेन गेट बंद होना है विजिटर के लिए ,दुआ सब यही कर रहे थे की वो मजनू चला न जाये ! पर उसे जाना भी कहा था कम्बक्त को ? सो वो न गया , मोका ही ऐसा था , फिर क्या हुआ ? अंदर क्या हुआ ? ये तो पता नही ! पर बहार फरबरी के महीने में भी गर्मी कड़ी थी , सारा प्लान तेयार था | पर कुछ लोग मुफ्त की सिगरेट पी- पी
कर ये जता रहे थे की कुछ नही होंगा उसका और पूरा पेकेट ख़तम करने पर अमादा थॆ (,और हा ,पता ही नही चला की कोन सिगरेट का पूरा पाकेट ले कर आया है उस दिन , रोज़ तो पैसे खर्च पर महा भारत होती थी बीडी तक लाने पर हिसाब होता था ) “कोई और फाएदा उड़ा लेंगा “, -चलो छोड़ो मरने दो’, जो करते है ! करने दो ! बददुया न लो मजनू की ,फिर रात को 11 बजे , परिसर के अरविन्द केजरीवाल के नाम से , सुरक्षा बल को बता दिया गया की परिसर का महोल गन्दा हो रहा है ।बच्चे बिगड़ रहे है।( ये बही बच्चे है जो बचपन से ही दिन मे ऋतिक और रात मे सलमान खान है )आदि आदि | बड़े सहाब एक्सेन साहब का नाम भी जोड़ दिया गया । नही तो सा…. हिलते भी नही !

साहब के नाम पर .तुरंत कार्यवाही हुई | सुरक्षा दल के सब लोग छापा मारने को पहुच गए मानो इसी काम के लिए खाली बेठे थे ।बैसे भारत में हर आदमी इस टाइप के काम को ,हर समय बिलकुल खाली रहता है ।
बस सहाब ! मकान को चारो तरफ से घेरे में ले लिया गया। मानो अंदर लादेन टाइप कोई मेहमान पाकिस्तान में हो !और अमेरिका के सैनिक चांदमारी पर आये हो |गलती ये हुई की गार्ड के साथ में कोई महिला नही थी ।बैसे आमतोर पर महिला गार्ड होती कहा है ? अगर होती , तो कोई गार्ड बहा ड्यूटी पर नही होता रात को 11 बजे !पर उन्हें तो डर था की मामला बड़े सहाब तक न पहुच जाये।
कुछ तो करना ही था ।पर मामला लड़की का था तो सोच समझ कर करना था जो करना था , पर करे क्या ? दिलजले अपनी सासे बस सिगरेट पीने के लिए ही ले पा रहे थे ! बाकि समय सासे रुकी थी उनका मोर्चा बिलकुल सही जगह पर था| सब कुछ साफ – साफ देखाई दे रहा था .टाइम ओर कोहरा बढता जा रहा था ठण्ड तो जवानों को लगती नही है न ,फिर बोतले भी थी ही ।पर उस दिन मनो बरत हो सबका , किसी से न पी
गयी |खाना भी पंजाबी ढाबे से आया पर किसी ने चखा भी न !

काफी देर तक कुछ न हुआ। फिर दो गार्ड़ हिम्मत करके आगे बढे और दरवाजा खुलवाया तथा पांच मिनट तक बात चीत की , कमरे की लाइट बंद थी . अचानक सब लोग अन्दर चले गए और लाइट जल गयी और पन्द्र मिनट बाद खाली हाथ वापस आ गए । और अपनी गश्त पर निकल गए ।पर गश्त बार बार उसी स्थान पर लागते रहे । दिलजलो का तन और मन दोनों जल गए ।धन पहेले ही जल गया था | मोर्चे से बहार निकलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी। उस रात सभी को वहीँ पर रहना पड़ा सिगरते और दो बोतल माँगा ली गयी ? खाने की बात भूल ही गए पूरी रात एक दुसरे को योजना की विफलता पर दोष देकर कभी सो कर कभी जागकर काटी? सबसे बड़ा दुःख तो इस बात का था कि valentine मनाने से खुशबू को रोक नहीं पाए।|ये सबने देखा की पर पूरी रात उसकी लाइट बंद ही रही थी ।बाद में पता चला की वो लड़की के रेस्ट रूम में छिप गया था ।जहा दुनिया की कोई पुलिश बिना महिला कर्मी के तलाशी नही ले पाती |

मनहूस सुबह,, गुलाबी बनकर खुशखबरी लेकर, आई। जबकि सभी लोग अँधेरे में ही अपने मुह छिपा कर अपने अपने घर चले गए थे। योजना सफल रही थी परन्तु दुसरे तरीके से , सुबह पांच बजे ही खुशबू के मोबाइल से बॉस पर फ़ोन आया और उसने अपने valentine को आवास परिसर से बहार निकलने के लिए रोना धोना किया , मांफी मांगी और “मैं अभी तुमसे मिलने को तैयार हूँ कह कर हथियार डाल दिए ।पे उनका नंबर कहा से लिया ? सभी के दिमाग के fuse उड़ गए । तत्काल में कबिनेट की बैठक बुलाई गयी गहन बाते हुई । जिसमे फिर वही गलती करी गयी जो हर गरीब करता है अपने को भगवन से मिले एक मात्र मोके पर ! तुरंत देता है रोटी , दया और माफ़ी । और valentine महोदय को खुद अपनी गाडी में बिठा कर बहार तक छोड़ दिया गया।अगले ही दिन ,लिखित मै माफ़ी सहित पुराना आरोप बापस ले लिया खुशबू ने । पर बिल्ली के भाग से कुछ बंदर लोगो का छिका टूट ही गया ……..उस बारे में कहानी के भाग – 2 में जरुर पड़े ……………………..अगर आप लोग इस पर अपनी राय दे तो कहानी मे भाग 2 लिखने में मज़ा आजाये ……….. अमन



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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

kavita1980 के द्वारा
February 12, 2014

दिलचस्प शैली –ननोरंजन और व्यंग्य साथ साथ  आशा करती हूँ की दूसरा भाग भी शीघ्र ही पढ़ने को मिलेगा

    aman kumar के द्वारा
    February 13, 2014

    नमस्कार जी . आपको समय लगा कर , कहानी पड़ने के लिए बहुत सुक्रिया ! आजाद लड़की भाग – २ , भी आ चुके है कृपया उन पर अपनी राय जरुर दे !

October 30, 2012

बहुत खूब उतम कृति के लिये बधाई , बस इंतजार है

    aman kumar के द्वारा
    November 21, 2012

    आपका सुक्रिया ! अगले दो भाग प्रस्तुत है !आशीर्वाद बनाये रखे !

nishamittal के द्वारा
October 16, 2012

बहुत अच्छी कहानी अगला भाग पोस्ट करिए.

    aman kumar के द्वारा
    October 17, 2012

    आपका सुक्रिया ! अगले दो भाग प्रस्तुत है !आशीर्वाद बनाये रखे !

    aman kumar के द्वारा
    November 21, 2012

    आपका सुक्रिया ! अगले दो भाग प्रस्तुत है !आशीर्वाद बनाये रखे …..

seemakanwal के द्वारा
October 13, 2012

अगली किस्त के इंतजार में .

    aman kumar के द्वारा
    October 15, 2012

    नमस्कार सीमा जी . आपको समय लगा कर , कहानी पड़ने के लिए बहुत सुक्रिया ! आजाद लड़की भाग – २ ,-३ भी आ चुके है कृपया उन पर अपनी राय जरुर दे !

drbhupendra के द्वारा
October 4, 2012

क्या बात है भाई जी उत्तम…

    aman kumar के द्वारा
    October 5, 2012

    साधुबाद भूपेंदर जी , बाकि के भाग भी पदिये !

aman kumar के द्वारा
September 7, 2012

आपका सुक्रिया !

ashishgonda के द्वारा
September 7, 2012

बहुत अच्छा लिखा,,,,लिखते रहिये,,,,

    aman kumar के द्वारा
    November 21, 2012

    आपका सुक्रिया ! अगले दो भाग प्रस्तुत है !आशीर्वाद बनाये रखे !

akraktale के द्वारा
August 25, 2012

अमन जी               सादर, कहानी का लेखन तो बहुत दमदार है किन्तु खुशी कब खुश्बू बन गयी समझ नहीं आया. कहानी कि पटकथा भी बहुत सुन्दर है. बधाई.

yogi sarswat के द्वारा
August 13, 2012

मस्त लिखा है भाई !

    aman kumar के द्वारा
    May 28, 2013

    योगी भाई को प्रणाम १ आपका स्नेह मिला धन्येबाद !


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