उलझन !मेरे दिल की ....

उलझन !.मेरे दिल की ....दिल की लड़ाई अब भी दिमाग से है !

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लक्ष्मी आ गयी !

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images (10)राजू भाई का नाम तो है राजकुमार , लेकिन नाम पुराना होने की बजह से अपना नाम सबको राजेश बताते है ।खुबसूरत तो बहुत है अभी तक , पर बालो को रंगीन बनाने के सोंक ने अब बाल ही उड़ा दिए थे । अब पूरा मैदान साफ है । नकली बाल भी लगवाए गए पर उनमे गर्मी बहुत लगती थी, रोज़ चिपकाने की परेशानी अलग थी । फिर अब सबके समज मे आ ही जाते है की बाल नकली है तो फायेदा क्या हुआ पद्रह हज़ार खर्च करने का ? तो वो प्रयोग भी विफल रहे । शादी तो आम निम्न वर्गीय परिवार की तरह 24 साल की उम्र में ही हो गयी थी ।पर पत्नी १७ की थी |परिवार बिलकुल रामायण की तरह था | बहुत प्यार था तीनो भाइयो में , वो बीच के भाई थे सबके सेवक । दसरथ मतलब रामप्रकाश जी भी सेवा से निवर्त हो गए थे ।उनकी शादी को अब 9 साल हो गए है पर उनके घर में अभी तक कोई बच्चा नही हुआ । छोटे भाई के भी दो बच्चे हो गए । बड़े के बच्चे तो जवान हो चले थे ।जिनको वो अपने बच्चो की तरह ही मानते रहे थे अभी तक ,पर बच्चे बस अपने काम , बढ़िया खाना, और पैसे के लिए ही उन्हें अपना मानते थे ।
काम निकल जाने पर वो राजू चाचा ही रह जाते थे ।और दुसरे की थाली को देख कर अपना पेट नही भरता इसी तरह अभी तक बच्चो के प्यार के लिए भूके थे ।
अपनी छोटी सी प्राइवेट नोकरी मै , बहुत पैसा लगा दिया था इलाज़ में ,पर कुछ न हुआ ।एक बार तो बड़े भाई के कहने पर उन पर भी दाव लगा दिया पर उनकी भाभी करवाचोथ के वर्त पर गर्भास्था के बाबजूद पूर्ण भूखी थी ।और अपने बूटी पार्लर पर होने वाली कमाई को न छोड़ पाने के कारन , दर्द होने पर भी डोक्टर के पास नही गयी | और वहा रे किस्मत !अगले ही दिन बच्चा हुआ भी तो मरा हुआ ।पर दुःख इसलिए बड गया की वो लड़का था । कुल मिलाकर 70 -80 हज़ार रुपे लग गए भाभी के देखभाल में , पर नतीजा न निकला ।एहसान भी रह गया भाई – भाभी का ।
सहर के डोक्टर कम पड गए, दिल्ही तक हो आये थे । मेरठ में भोले नाथ का कलिपल्टन ,मथुरा, बन्दाबन , बद्रीनाथ – केदारनाथ मन्दिर तो क्या ? ६-७ बार कावर जल भी ले आये थे मोटर सयेकिल पर , साथ ही पत्नी जी दुर्गा माता के नवरात और भोले का सोमबार सारे बरत करती थी और प्रान कलियर की दरगह ,सरधना का बेगम समरू का चर्च ,शीसगंज के गुरु जी सब को तो मनाया पर कोई नही माना ।अब भी बहुत सारे साधू – संत ,दरवेश ,पीर – मुनीर धन लीला का खेल रहे थे ।
यारो – दोस्तों का कहना ये था , की जवानी के दिनों में बहुत लडकियों को धोका दिया था । राजकुमार जी ने इसलिए उन लडकियों की बददुया से ये सब हो रहा है । दरअसल जवानी के समय 15- 16 लडकियों के साथ ……
अरे ! खाना ,पीना, घूम- फिर चुके थे ।पर दिल्लगी ही रही । दिल की लगी नही बनी कोई , समाज और घरवालो का डर था ।चहा कर भी लव मेरिज नही कर पाए ।पर एक दो बार मन ही मन दूसरी शादी का विचार बनाया पर किसे को बोल पाने की हिम्मत ही न हुई ?साली पर डोरा डाला पर बड़ी बहन को तलाक देकर छोटी से शादी करने को कोन तैयार होता ? सो मामला ख़तम ।
एक दिन पता चला की पास के कसबे के छोटे से हॉस्पिटल की नर्से , बच्चा दिलवा सकती है । बहा पर बिन बिहाई लडकिया / लड़के की चाहत में 2 -3 लडकिय जन्माँ चुकी महिलाये , अपने पाप कर्मो को मिटाने ओर शिशु हत्या का नया पाप करने आती है ।काफी इंतजार के बाद भी कोई लड़का नही मिला ।बहा भी लडकियों का मौसम चल रहा था ।20 हज़ार अग्रिम पानी में गया ।नर्से भी काम न आई ।नही तो उसे दोनों तरफ से कमाई होनी थी ।
कई राज्यों के अनाथ आश्रमो से संपर्क किया गया पर लम्बा चोडा फार्म भरना उस पर सरकारी नोकरी न होना , सम्पति उनके नाम होना और बहुत सारी प्रक्रिया पूर्ण न कर पाने के कारण बहा भी काम नही बना । बच्चा गोद लेना कितना मुस्किल है ? गरीबो के लिये ,अब पता चला उनके चहने वालो को ।हमारे देश से विदेशियों को आराम से बच्चे गोद मिल जाते है ।उट दोड़/ घर का काम ,नोकर और बाकी कामो के लिए| पर असली जरुरत मंदों को नही ।
रोज़ अखवार भी देखे जाते थे पर लावारिश बच्चो में भी सब लडकिय ही होती थी । लगता तो ये था की पुलिस भी लडको को कही ठिकाने लगा देती है और अपनी जेब गर्म करती है ।लड़के अब भी सोने के भाव बिकते है या बस भारत में सारी की सारी लडकिय ही लावारिस होती है ।जिनका बारिस भगवान ही होता है |
अचानक आशा की एक किरण नही , पूरा सूरज दिखाई दिया । जब शहर मै नई लेडी डोक्टर लन्दन से आई और पड़ोस के एक दोस्त के यह एक स्वामी जी के असिर्वाद से लड़की हुई , शादी के 5 सालो के बाद ।अब दोनों टोटके साथ- साथ ही चले । दोनों ने ही साधारण इलाज़ किया और लगभग 6 महा में ही खुसखबरी मिल गयी ।एक साल मै बालक हो गया और जादू हो गया । असंभव भी संभव हो गया ,पर भगवान की लीला बड़ी नियारी है ! राजकुमार जी के यहा लक्ष्मी जी आ गयी ।
पर वो पत्नी सहित बड़े खुस थे ! यारो को दारू / मुर्गा की पार्टी उधर लेकर भी दी गयी और महोल्ले बालो को जागरण के साथ भंडारा टाइप दावत । बिना पूछे वो बोलते थे, चलो अच्छा है ! लड़की हुई !……….सच में लक्षमीजी आ ही गयी ।जय लक्ष्मी माता की !!!



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20 प्रतिक्रिया

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यूँ तो कहने को आज हम एक प्रगतिशील समाज के बाशिंदे है परन्तु आज भि बेटियों के समाज की विकृत मानसिकता और बेटे की लालसा का सुंदर एवं सजीव चित्रण किया है ..प्रशंसनीय

    aman kumar के द्वारा
    February 10, 2014

    आभार

aman kumar के द्वारा
December 14, 2012

आपका कहना बिलकुल ठीक है ! परन्तु अभी भी लोगो मे लडको को लेकर बिरोधाबास है | बुदापे मे लड़के कितना साथ देते है आजकल ? पड़े लिखे तो अमेरिका मे जा बसते है | कम पड़े एस लायक ही नही होते | समय देने के लिए आपका सुक्रिया !

Sushma Gupta के द्वारा
December 14, 2012

प्रिय अमन जी, आपका आलेख समाज की उस असामान्य -दशा का एक ऐसा विकृत सोच बाला आइना प्रस्तुत कर रहा है,जिसमें लड़कियों को हीनता की द्रष्टि से देखा जाता है,उन्हें तिरस्कृत किया जाता है,लेकिन अपवाद स्वरुप कुछ लोग उसे लक्ष्मी का अवतार भी कहते हैं …इस सामाजिक विडंवना को सुन्दर रूप में प्रस्तुत करने हेतु आपको बहुत वधाई…

    January 17, 2013

    जी, माफ़ कार्य अवतार तो लगभग सभी कहते हैं…………पर इसकी आड़ में एक लड़की, एक औरत के बारे में लोगन का क्या नजरिया है………किसी से छुपा नहीं……..मैं अपवाद की बात नहीं करूँगा. इस कहानी से भी अमन जी स्पष्ट कर दिए भारतीय समुदाय के सार्थ को जब लड़का नहीं मिला तो उसे लड़की से संतोष करना पड़ा ..मतलब न दरवाजा खुल सकिहन ता खिड़की ही सही……………

    aman kumar के द्वारा
    January 18, 2013

    आपका कहना बिलकुल ठीक है ! परन्तु अभी भी लोगो मे लडको को लेकर बिरोधाबास है | बुदापे मे लड़के कितना साथ देते है आजकल ? पड़े लिखे तो अमेरिका मे जा बसते है | कम पड़े एस लायक ही नही होते | समय देने के लिए आपका सुक्रिया !

rekhafbd के द्वारा
October 15, 2012

अच्छी प्रस्तुति पर बधाई अमन जी ,ऐसा देखा गया है कि कई बार लडकियां लड़कों से बेहतर होती है ,आभार

    aman kumar के द्वारा
    October 16, 2012

    अधिकतर लडकिया लडको से बहेतर होती है ! मेरी माता , बहेन , सब मुझसे अच्छे है !आपका सुक्रिया !

yogi sarswat के द्वारा
October 13, 2012

सच कहा आपने , लड़की लक्ष्मी ही तो हैं

    aman kumar के द्वारा
    October 15, 2012

    योगी बही का असिर्वाद ! सदा बनाये रखे !

ashishgonda के द्वारा
October 13, 2012

आदरनीय! सादर, मैं इसे ही सबसे गंभीर मुद्दा मानता हूँ, आने वाले नवरात्र में लोग कन्यापूजन तो करते हैं परन्तु अपने घर कहीं कन्या न आ जाए इसका भय बना रहता है. कभी मुझे भी पढियेगा.

    aman kumar के द्वारा
    October 15, 2012

    आपका साधुबाद आशीस भाई ! सच ही कहा है आपने !

akraktale के द्वारा
October 12, 2012

अमन जी             सादर, जब अपनाना ही पड़े तो लडकियां लक्ष्मी हो जाती है वरना लडकी को अपनाने में कोताही कि जाती है. समाज के एक तबके का यह दोगलापन कभी समझ नहीं आया.                          आपके आलेख में गरीबों को बच्चे गोद लेने में नियमों कि बाधा वाकई दुखी करने वाली बात है.                             अंत में आपसे गुजारिश है कि शब्दों कि त्रुटियों पर भी ध्यान दिया करें. इससे पढ़ने वाले को सुगमता होगी. सुन्दर आलेख के लिए बधाई स्वीकारें.

    aman kumar के द्वारा
    October 15, 2012

    समाज का एक तबका नही ! सरे तबके यही सोचते है ! बस कोई एक आध होंगा जो शिक्षित हो , नही तो यहाँ सब बस साक्षर ही है ! गलतियों के लिए माफ़ी सहित , आपका अति सुक्रिया !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 11, 2012

जय हो. समाज में लड़की को कोई गोद नहीं लेना चाहता, राजू जी भी उन्ही में थे. अंत में लक्ष्मी जी आ ही गयीं. वाह प्रभु की लीला. बधाई. आदरणीय अमन जी, सादर अभिवादन के साथ.

    aman kumar के द्वारा
    October 15, 2012

    उपर बाला सदा हो इंसाफ करता है ! आपका अति सुक्रिया जो अपनी टिपणी एस लेख हो दी !

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
October 10, 2012

aman जी ,बहुत ही अच्छी प्रस्तुति के लिये बधाई ,,,रोज़ अखवार भी देखे जाते थे पर लावारिश बच्चो में भी सब लडकिय ही होती थी । लगता तो ये था की पुलिस भी लडको को कही ठिकाने लगा देती है । या बस भारत में लडकिय ही लावारिस होती है

    aman kumar के द्वारा
    October 10, 2012

    आपकी अति क्रप्या है ! क्रपया बनाये रखे !

manoranjanthakur के द्वारा
October 10, 2012

जय लक्ष्मी माता की …. महिमा अपार … बहुत बधाई

    aman kumar के द्वारा
    October 10, 2012

    आपका सुक्रिया मनोरंजन भाई ! जय लक्ष्मी माता !


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