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उलझन !.मेरे दिल की ....दिल की लड़ाई अब भी दिमाग से है !

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हड़ताल का मतलब !

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हड़ताल का मतलब !
अभी भारत की जनता का शोषित बर्ग ये नही समझ पाया है की मात्र हड़ताल से होना क्या है ? केवल उनके जैसे दुसरे गरीब लोगो को परेशानी ही होनी है । जिन तक आवाज़ जानी चहिये थी बहा तक तो बस राजनितिक फ़ायेदे और नुकसान के आकड़े ही पहुचते है । नक्कारखाने मै तूती की आवाज़ के जैसे कुछ नही होने वाला , पर गरीब की मार गरीब के उपर बाली बात जरुर हो जाती है । मजदूरों की लड़ाई मे मजदूर ही भूखा रहे जाता है ।सोचो करोड़ो मजदूर हड़ताल के कारन अपनी रोज की कमाई भी नही कर पाते उस दिन उनके बच्चे बीबी क्या खाते होंगे ? जिनके पास रोज कमाओ रोज खायो की मजबूरी होती है |कोई रोगी हो , किसी के घर मे कोई और समस्या हो पर यातायात बंद होने पर करोड़ो लोग बेबस हो जाते है | बांछित स्थान पर नही जा पाते |बैंक के बंद होने से कितना नुकसान होता है | ये नुकसान किसी नेता का नही है हमारा अपना ही है आखिर मे हमें ही कीमत चुकानी होंगी |जबकि लोकतंत्र मे सबसे बड़ी ताकत होती है मताधिकार !अगर उसका प्रयोग सही तरीके से किया जाये तो हड़ताल की जरुरत ही नही पड़े ।जनता के अपने सारे मुद्दे चुनाव मे ख़तम कर दिए जाते है और नये मुद्दों के जाल मे जनता फस जाती है रोटी ,, कपडा और मकान ये नारे ६५ सालो से दिए जाते है पर होता कुछ नही है | क्यों न चुनाव से पहेले सारे डालो से साफ बात करी जाये अपने मुद्दे हो अपनी सरकार हो |अब लोग अपने मत का प्रयोग करने भी नही जाते तो नेताओ को क्या डर ? जाति धर्म, लिंग रंग, निवास को भूलकर होकर जिस दिन भारत मे अगर ८०% तक भी मतदान होंगा संसद बास्तव मे लोकतंत्र का मन्दिर बन जायेंगा ।और किसी हड़ताल की जरूरत न होंगी |



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