उलझन !मेरे दिल की ....

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नीडो तानिया ! हमे माफ़ कर देना ! जंक्शन फोरम

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हम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभी
आओ विचारें आज मिल कर, यह समस्याएं सभी
वे आर्य ही थे जो कभी, अपने लिये जीते न थे
वे स्वार्थ रत हो मोह की, मदिरा कभी पीते न थे
वे मंदिनी तल में, सुकृति के बीज बोते थे सदा
परदुःख देख दयालुता से, द्रवित होते थे सदा
मन से, वचन से, कर्म से, वे प्रभु भजन में लीन थे
विख्यात ब्रह्मानंद नद के, वे मनोहर मीन थे ( आर्य / मैथिलीशरण गुप्त )
दिल्ली में अरुणाचल प्रदेश के छात्र निडो तानिया को छोटी से बात पर मारा गया जो देश भर में निदा का कारण बना है | ,एस घटना के बाद एस देश की ये बात सामने आई है की देश मे शकल देखकर भी भेद -भाव होता है | कभी किसी को पहाड़ी” तो किसी को बिहारी” किसी को भय्या” या गुजु” कश्मीरी ” , पंजाबी ” बोला जाता है और मजाक बनाया जाता है जब एस प्रकार कि घटनाये युवाओ के साथ अधिक होती है एस कारण और अधिक गम्भीर मामला बनता है |जो देश कि एकता और अखंडता के लिए बहुत घातक सिद्ध हो सकता है अलगाव कि भावना आने पर , सभलना मुस्किल होंगा |
आज भी अनेक प्रकार से देश के बहुत सारे नागरिको को विचित्र कारणो से अपमान का सामना करना पड़ रहा है |ये जातिबाद का ही एक रूप है |
एस घटना के बाद सम्पूर्ण देश में उत्तर पूर्व प्रदेशो के नागरिको को भेद भाव के विरोध में सडको पर आना पड़ा |
जबकि भारत के सम्पूर्ण एकात्म देश है जहा हर नागरिक को कही भी बसने – शिक्षा और रोजगार का मूल अधिकार भी है | भले ही ये सरकार के विरुद्ध प्राप्त होते है पर इसकी जिम्मेदारी भी सरकार कि है कि भेद भाव किसी से किसी प्रकार से न हो
अनु १५ सविधान
15[1] राज्य अपने नागरिकॉ के मध्य मूलवंश, धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर किसी प्रकार का विभेद नहीं करेगा [किंतु अन्य आधारॉ पर विभेद किया जा सकता है]
15[2] नागरिकॉ को सार्वजनिक स्थानॉ तक पहुँचने का अधिकार होगा[ भोजनालय,सिनेमा,कुँए,मन्दिर] उन्हें मूलवंश,जाति ,धर्म,लिंग,जन्म-स्थान के आधार पर नही रोका जायेगा.जहाँ पहला अनुच्छेद केवल राज्य के विरूद्ध लागू था यह सामान्य नागरिको के विरूद्ध भी लागू होता है, यह अनुच्छेद छुआछूत के विरूद्ध प्रभावी उपाय है |
301. देश में व्‍यापार, वाणज्यि और समागम की स्‍वतंत्रता.

भारत में अनेकता में एकता के बात ,मात्र नारा भर
ही रह गयी है , यहा इतनी
विविध प्रकार की समाजिक जीवन शेलीया है जिनकी गिनती करना ही मुश्किल होता
है | जब भी देश को एक स्तर पर जोड़ना जरूरी होता है जो अभी तक नही हो पाया है परन्तु अभी भी समाज के एक बड़े तबके का सामाजिक विकास नही हो पाया है |
,ये लोग देश को सम्पूर्ण इकाई के रूप में नही देख पाते जिसके लिए जरूरी
है शिक्षा और समानता के साथ विकास ,
परन्तु धर्म , जाति , भाषा , क्षेत्र ,अर्थ ,नस्ल और लिंग भेद के आधार
पर भेदभाव करना देश को तोड़ने बाले कार्य के सामान अपराधिक कृत्य है | और
सविधान के मूल अधिकारों के विरुद्ध है | इसको देश द्रोह मानना चाहिये | देश में अनेको समस्या है जिसमे जातिबाद नक्सल वाद , अलगावबाद बहुत खतरनाक होती जा रही है अब एस प्रकार कि घटनायो पर जरूरी कार्यबाही होनी चाहिए |
देश की राजधानी में ऐसे अपराध का होना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है | अब जरूरत है कि देश को एक सूत्र में
बंधा जाये जिसमे सभी सामान अधकार पा सके | एस देश को बनाने का काम करे
शिक्षा के लिए दूर दराज़ स्थानो से आये विद्यार्थीयो को सुरक्षा मिले , समानता और प्यार मिले …..देश को मजबूत और अखंड बनाने के लिए ये जरूरी है , दोषियो को तुरंत सजा मिले |



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
February 18, 2014

पूर्णतया सहमत हूँ हम क्षमा मांगने के अतिरिक्त क्या कर सकते हैं अच्छी पोस्ट

    aman kumar के द्वारा
    February 18, 2014

    हां आप ठीक कह रही है ? पर देश को टूटने से बचाने के लिए सबको एक होना ही होंगा ! आभार

jlsingh के द्वारा
February 13, 2014

देश की राजधानी में ऐसे अपराध का होना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है | अब जरूरत है कि देश को एक सूत्र में बंधा जाये जिसमे सभी सामान अधकार पा सके | एस देश को बनाने का काम करे शिक्षा के लिए दूर दराज़ स्थानो से आये विद्यार्थीयो को सुरक्षा मिले , समानता और प्यार मिले …..देश को मजबूत और अखंड बनाने के लिए ये जरूरी है , दोषियो को तुरंत सजा मिले | प्रिय अमन जी, सादर! आपने बात की गम्भीरता को संवैधानिकता के साथ समझाया है….दुःख इस बात का होता है कि इस तरह की घटनाएं जब राजधानी दिल्ली में घटित होते है तभी सबका ध्यान आकृष्ट होता है चाहे निर्भया कांड हो, या इस बार पूर्वोत्तर का मामला आया और नीडो की बेरहमी से मार दिया गया. पर इस तरह की घटनाएं अन्य क्षेत्रों में होती रही है …जिसके लिए स्थानीय नेता या संगठन जिम्मेदार होते हैं. पूर्वोत्तर में भी हिंदी भाषियों (बिहारियों के साथ जुल्म हुआ है, महाराष्ट्र में राज ठाकरे ने भी कम अंधेरगर्दी नहीं मचाई है और वे गर्व से कहते हैं हमारे ऊपर ११० केस है, है हिम्मत तो गिरफ्तार करो. १२.०२.१४ को मुम्बई बंद का नाटक तोड़ फोड़ सब कुछ जायज हो जाता है कानून और प्रशासन आँख मूंदे रहता है. दक्षिण भारत में भी कभी कभी हिंदी भाषियों पर हमले हुए हैं… आप कहते हैं दोषियों को तुरंत सजा मिले – आप भी जानते हैं दोषियों को दोषी साबित करने में अरसा बीत जाता है फिर ऊपरी अदालतें सजा को कम करने या माफ़ करने के लिए ही बैठी रहती है. आमूल चूल परिवर्तन की जरूरत है. संविधान की व्याख्या सभी अपने हिशाब से करते हैं नियम बनाए वाले नियम की धज्जियाँ कैसे उड़ाते हैं यह आप भी देखते हैं और हम सब भी… सवाल एक नीडो का नहीं है ..सवाल मानसिकता का है…सादर!

    aman kumar के द्वारा
    February 13, 2014

    आपने सदा मेरा मार्गदर्शन किया है आप सही कह रहे है . आपका समय मिला उसके लिए आभार

उल्लेखनीय! एक संवेदनशील एवं गंभीर विषय..सच है आजादी के साठ दशको के पश्चात भी देश में इस प्रकार की संकीर्ण मानसिकता विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक कारणों से पोषित की जा रही है जो देश की एकता एवं अखंडता के खतरा है अपितु शर्मनाक भि है..यह सरासर संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिको के अधिकारों का हनन है..इस गंभीर एवं संवेदनशील मुद्दे पर सराहनीय प्रस्तुति..

    aman kumar के द्वारा
    February 13, 2014

    आप की बात मान जागरण ने जंक्शन फोरम के लिए विषय चुन लिया .. आपका समय मिला उसके लिए आभार


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