उलझन !मेरे दिल की ....

उलझन !.मेरे दिल की ....दिल की लड़ाई अब भी दिमाग से है !

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लोकतंत्र का स्वाद , मोदी जी के साथ !

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मोदी जी के नेतृत्व में हुए 2014 के चुनावो को उनके बेहतरीन प्रबंधन में हुयी एक
शाही दावत माना जा सकता है |जिसमे सारे देश को शामिल किया गया , जिसको जो चाहिये था बही स्वाद मिला
किसी को
जातिबाद की सतरंगी चाट मांगने पर मिली तो किसी तो धर्म की रस मलाई बिना मांगे
दी गयी , राष्ट्र वाद के रसगुल्ले भी थे तो विकास और सुरक्षा की
दाल भरपूर घी डाल क़र परोसी गयी !
किसानो के लिए शाकाहारी बिरयानी तो उद्ध्योग पतियों के लिए निवेश के कबाब ,
हा दक्षिण के पकवान इडली- डोसा और साभार जरुर कुछ कम पड़ गये ,और पंजाब में झाडू से कुछ किरकिरी सरसों के साग और मक्की के रोटी में मिलने के कारण थोड़ी सी बेस्वादी हुई पर
, युवायो को रोजगार के संगीत पर न्रत्य करने की सोच मिली और दिल को छु
लेने बाला गायक हो जेसे ,ऐसा मेहमान नवाज मिला वर्षो से कांग्रेस के जेल सरीखे खाने से हुए
हाजमा ख़राब होने के बाद जनता ने एस दावत का भरपूर मजा लिया और मेजवान को
सत्ता का सबसे बड़ा उपहार दे ही दिया !और जो लोग इस दावत से दूर रहे आज पानी पी- पी कर गलती मान रहे है और बचे खुचे के लिए अब आपस में लड़ रहे है या मिलकर जुगाड़ बना रहे है की कुछ तो हाथ लगे ,६५ सालो में पहली बार इतनी बड़ी दावत के बाद अब देखना यह है की आने बाले समय में मोदी जी इस
स्वाद और महोल को बनाये रखेंगे या अन्य लोगो की तरह मुह का मजा और पेट का हाज़मा किरकिरा क़र
देंगे |क्युकी जनता ५ सालो के बाद फिर उम्मीद करंगी की भी स्वाद मिले ……



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