उलझन !मेरे दिल की ....

उलझन !.मेरे दिल की ....दिल की लड़ाई अब भी दिमाग से है !

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गुनहगार ........

Posted On: 8 Dec, 2014 कविता,Junction Forum,Hindi Sahitya में

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सांप बेरोजगार हो गये, अब आदमी काटने लगे।
कुत्ते क्या करे? तलवे, अब आदमी चाटने लगे। ( संतोष गुप्ता जी आभार )
बीबी के भड़काने पर माँ – बाप को डाटने लगे ,
सुसराल के कुत्ते भी सब देवता हुए ,
लालच से , अपने भाई बहने दिल से साफ हुए ..
लेकर क्या जायेंगा , दुनिया से , वो मकान . वो दुकान . वो सोना , वो चांदी
छूट जाता है ,सब यहा , प्यार हो, सम्मान हो , दुलार हो
परमात्मा भी मिल जायेंगे , गुनाह अगर माफ़ हुए ….



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
January 3, 2015

आदरणीय अमन कुमार जी ! नव वर्ष 2015 की बहुत बहुत बधाई ! आपके और आपके समस्त परिवार के लिए नव वर्ष मंगलमय हो !

    aman kumar के द्वारा
    January 20, 2015

    आपका आशीर्वाद प्राप्त हुआ क्रतार्थ हुआ  …….


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