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:मन की बात किसानो की !

Posted On: 16 Mar, 2015 social issues,Junction Forum,Politics में

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मार्च महीने में चौथी बार भारी बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। फसलें बबार्द हो गई है। वहीं कई स्थानों पर ओले भी गिरे हैं। एैसे में गेंहू, सरसों,चना और मटर की फसलें खासतौर पर ज्यादा प्रभाावित हुई हैं। इस बारिश ने किसानों की सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। वहीं दूसरी ओर सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। इससे न केवल किसान प्रभावित हुआ है। बल्कि आम आदमी को भी इसका खामियाजा भुगतना पड रहा है। इस महीने में बारिश ने न केवल सौ साल का रिकार्ड ध्वस्त किया है।किसानों के लिए फसलों का बिमा जरूरी है अभी बारिश की वजह से सब फसल खराब हो गयी यही वजह है के किसान आत्महत्या करते हैं
किसोनें के लिए जेविक खाद का बन्दों बेस्ट करना चाहिए और प्लास्टिक वन्हें भी बन करना चाहिए।SEWAGE TREATMENT PLANT GAON MEIN LAGANA जरूरी है।
इस से पानी की बचत और खेती के लिए खाद भी मिल सकेगी।
उपजाऊ जमीं को LAND REFORM BILL से दूर रखना होगा।गन्ना किसानों के साथ अन्याय कब तक होता रहेगा. आज भी गन्ना किसानों का 15000 करोड़ रूपया चीनी मिलों पर बकाया है.किसानों को गन्ने की कीमत नगद क्यों नहीं दी जाती यह सबसे बड़ा सवाल है . कब तक किसानों का शोषण होता रहेगा I गन्ना किसानों को ही गन्ने का मूल्य निर्धारित करने का अधिकार देने की कृपा करें प्रदेश/केंद्र सरकारों को नहीं .सर, केवल आश्वासन देकर फ़र्ज़ पूरा न करैं..सर कृपया गन्ना नीती बदलें.आपसे बड़ी उम्मीदें हें.
उनके लिए नयी तकनीक का इस्तेमाल करने का तरीका सिखाना बहुत जरूरी है।किसानों की हालत बहुत दयनीय है.किसानों को अपने उत्पाद का मूल्य निर्धारित करने का अधिकार क्यों नहीं है? इस बार तो प्राकृतिक आपदा ने किसानों की सभी फसलें तबाह करदी हें.प्रदेश सरकारें ‘मुआवजा’ देने के नाम पर झुनझुना दिखा कर किनारा कर लेंगी.इन्हें अपनी दुर्दशा देख कर आत्म हत्या करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा I जब बाज़ार में हर चीज़ मैग्ज़िममरिटेल प्राइस(MRP) पर मिलती है तो किसानों के उत्पाद मिनीमम सपोर्ट प्राइज (MSP) पर क्यों लिए जाते हें. किसानों के लिए कुछ कीजिये
किसान की उपज संतान के समान होती है,भंडारण,विपरण,बाजार,सिचाई,बिजली,मौसम
की मार,उन्नतबीज,बैंकऋण मुश्किल,गन्ना भुगतान आम समस्यये है|किन्तु नकली
खाद,घटतोली,नएतकनीकी उपकरण न मिल पाना,बेज्ञानिक शोध अपर्याप्त,उपज का
उपभोक्तानुरूप संस्कारण न बना पाना,बिचोलियों का बाजार कब्जा,छोटी होती
जोत ,फसल बीमा न हो पाना होना ,हित योजनयो का बंदर बाट खास बिदु
है,किसान वो मजबूर है जो खरीद और विक्रय दोनों कार्यो मे लूटा जाता
है|डिजिटल तकनीक उनको सबल कर सकती है सरकार उनको तकनीक से जोड़े तो
हरितक्रांति फिर सफल होगी |रत की रीढ़ कृषि ओर किसान को कुछ अधिक नही चाहिए \ वो हर प्रकार की विपरीत परिस्थितियों में कड़ी मेहनत करने को तैयार है \ उसे तो आज के प्रतियोगिता से भरे युग में आधारभूत अधोसंरचना जैसे पानी बिजली बिज आवश्यक खाद ओर तकनीक सुलभ अपनी भाषा में सरकार से मिले ओर वह जी उत्पादित करता है उसका योग्य बाजार ओर उचित भाव मिले बस फिर क्या देश के लिए रोजगार और आर्थिक उन्नति में बढ़ोतरी जैसा चाहे वैसा होगी ये सभी चीजे मुफ्त में नहीं चाहिए \ धन्यवाद्
किसान भाइयो को खेती के साथ साथ अन्य कुटीर उद्धोग या गाव आधारित कार्य
अवश्य करने चाइये और अच्छा हो की ये काम घर की मुखिया नारी के हाथ मे हो
ताकि खेती के साथ साथ आमदनी बड़े और महिलयों को भी आत्मनिर्भर बनाया जा
सके ये कार्य है , मुर्गी पालन , दुग्ध पशु,रेशम – मधुमक्खी-मछ्ली
पालन,टोकरी या अन्य हस्तशिल्प ,स्वम सहायता समूह बनाकर आचार , पापड़ ,फलो
- सब्जियों के सॉस और जेम हर किसी को काम करना है इस देश के समाज के और
अपने गाव के निर्माण के साथ साथ अपने परिवार का विकास करना है सरकार आपके
साथ है !



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
March 17, 2015

प्रिय अमन कुमार जी, सादर अभिवादन! किसानों की समस्या पर आधारित आपका आलेख काफी महत्वपूर्ण है …मैं भी किसान का बेटा हूँ , भले ही अभी नौकरी कर अपनी जीविका चला रहा हूँ पर किसानों की समस्या से पूर्ण रूपेण परिचित हूँ ..यही कारन है की आज कोई भी पढ़ा लिखा व्यक्ति कृषि कार्य से दूर भागता है. आपका आलेख बहुत ही महत्वपूर्ण है और आपने भी उपजाऊ जमीं को LAND REFORM BILL से दूर रखना होगा के बात कही है….पर उनकी सुनता कौन है?

    aman kumar के द्वारा
    July 22, 2015

    आपका आभार बड़े भाई


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